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दुनिया के सबसे दर्दनाक हादसे का फैसला(भाग -1)

दुनिया के सबसे दर्दनाक हादसे का फैसला(भाग -1)
                        हिरोशिमा डे
           दोस्तों, 6 अगस्त 1945 के दिन जापान के हिरोशिमा नगर में अमेरिका द्वारा परमाणु बम गिराया गया था,जिसमे लगभग पोने 2 लाख लोग मारे गए थे| हिरोशिमा नगर के पीस पार्क में जलने वाली मशाल हमेशा इसकी याद दिलाकर दुनिया को हथियार मुक्त होने के लिए प्ररित करती रहती हैं|
आज पेश हैं आप सबके लिए वो सारी जानकारी जो आपको इस खतरनाक फेसलें को लेने कि पूरी वजह बताएगी|
इस फैसलें को लेने के पीछे कई कारन रहें जिनमे कुछ इस प्रकार हैं –
विभिन्न देशों के बीच समझदारी का अभाव|
राजनेता तथा उनका वैक्तित्व|
राजनेताओं की अदुर्दार्शिता|
वैज्ञानिकों का एकमत न होना|
विश्व के शीर्ष नेताओं कि बैठकें|
(ये सब कारण पुरें लेख में आपकों खुद ब खुद समझ में आ जायेंगे|)
परमाणु बम का निर्माण –
परमाणु बम के निर्माण कि शुरुआत उस समय से हुई जब नोबेल पुरस्कार विजेता अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1941 में अमेरिकी राष्ट्रपति फेक्लिन रूजवेल्ट को इस योजना में फण्ड देने के लिए मना लिया| लेकिन इस बम का परीक्षण होने से पूर्व यानी 12 अप्रैल 1945 को ही रूजवेल्ट इस संसार से अलविदा हों गयें| इस कारण वैज्ञानिक इस बम कि शक्तिके बारें में एकमत नहीं हों पायें|
जापान को पराजित करने का दबाव –
रूजवेल्ट के बाद हैरी ट्रूमैन अमेरिका के राष्ट्रपति बनें| विश्वयुद्ध में अमेरिकी सैनिको कि मोतों, पर्ल हार्बर व कामीकाज के जापानी हमलों से अमेरिका कि जनता बहुत गुस्सा भर गया था,यह गुस्सा अखबारों में सर कलम किये गए अमेरिकी सैनिकों को देखकर और फुट पड़ा तथा ट्रूमैन पर जापान को प्रसत करने का जबरदस्त दबाव आ गया|

बम गिरने का निर्णय –
ट्रूमैन जापानियों के द्रिड संकल्प को जानते थे इसलिए वो जापिनियों को बताएं बिना बम गिराने कि योजना बना रहे थें| जुलाई 1945 कि दो घटनाओ ने हिरोशिमा का हश्र तय किया| पहली बर्लिन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री विस्टन चर्चिल, रूसी तानाशाह जोसफ स्टॅलिन और ट्रूमैन की बैठक और दूसरी इस बैठक में ट्रूमैन को खबर मिलना की बम का परिक्षण कर लिया गया हैं|

हिरोशिमा पर ही बम क्यों गिराया गया –
हिरोशिमा जापान की सेकेंड आर्मी का मुख्यालय इसके अलावा अमेरिकी सेना को भरोसा था कि इस शहर में युध्बंदी नहीं हैं तथा यह जापान का 7वां सबसे बड़ा शहर होने के साथ यहाँ हथियार बनाने के कई कारखाने मौजूद थें|

31 जुलाई 1945 को ट्रूमैन ने यह कहकर बम गिराने का आदेश दिया कि “ केवल सेन्य ठिकानो को निशाना बनाया जाएँ| महिलायों और बच्चों को नहीं|” जो बताता हैं की ट्रूमैन को बम कि शक्ति के बारें में कितनी कम जानकारी थीं|
6 अगस्त 1945 को बम गिराने वालें विमान के पायलट के मुह से निकला था “ ओह माय गोड, यह हमने क्या कर डाला|” इस घटना में पौने 2 लाख लोग मारें गयें थें तथा इसके तीन दिन बाद नागासाकी पर गिराए गयें बम में 90000 लोग मारे गयें थें|

(अगले भाग में पढिये नागासाकी पर बम क्यों गिराया गया, हमलें से जुढ़े सीक्रेट तथ्य, हमलें पर इससे संबंधित देशों के अलग-अलग मत और वर्तमान में आणविक हथियारों कि समस्या|) 

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