क्या भगवान को तमाशा दिखाने वाला समझ रखा हैं?
दोस्तों में भी एक छोटे कस्बे का रहने वाला हूँ, में जब भी घर रहता हूँ में रोज मंदिर जातां हूँ, और वास्ताव में किसी धार्मिक स्थल जाकर हमें अतभुत शांति महसूस होती हैं| मंदिर में अपनी पूजा करने के बाद एक जिज्ञसू विद्यार्थी होने के नाते में वहां आने वालें लोगों की क्रियाये देखता रहता हूँ | कोई प्रसाद चढाकर तो कोई दीपक – अगरबत्ती जलाकर भगवन को प्रसन्न करने के प्रयास करता हैं | बहुत से लोग पास ही के तालाब में मछलियों को आटा तो बहुत से लोग चिटीयों को आटा डालते हैं | जो वास्तव में प्रयावरण हितेषी कार्य हैं|
इन सब कार्यों से मुझे कोई आपति नहीं हैं बल्कि इन सब कार्यों में मै भी उनका सहयोग करता हूँ| लेकिन एक बात जो मुझे बिलकुल अच्छी नहीं लगती वो ये कि बहुत से लोग भगवान के सामने ऐसे पैसे फेक्तें हैं, जैसे किसी चौराहे पर तमाशा दिखने वाले के करतबों पर लोग पैसे फेक्तें हैं| बहुत से ऐसें भी है जो मूर्ति से आठ कदम दूर हैं वो वहीँ से पैसे उछाल कर फेकता हैं|
मेरा सवाल हैं की इस तरह वो किस प्रकार भगवान के प्रति अपनी श्रधा दिखाते हैं?
हर मंदिर में दान पात्र रखा होता हैं फिर भी लोग उसे इग्नोर करके मूर्ति के पास पैसे उछल कर फेक्तें हैं हो सकता हैं सब लोग ऐसा नहीं करते हों लेकिन जो लोग ऐसा करतें हैं उन्हें जरुर इस बात पर गोर करना चाहिए| मैंने इस बारें में मंदिर के पुजारी से भी बात कि लेकिन उनका जवाब था कि अगर हम लोगों को एसा करने से मन करेंगे तो हमें पैसे कैसे मिलेंगें?
इसके जवाब में मैं बताना चाहूंगा कि जिन लोगों को पैसे मंदिर में देने हैं वे मंदिर के दान पात्र में डालें और जिनको पुजारी को पैसे देने हैं वो सीधे पुजारी को पैसें देवें| लेकिन इस तरह पैसों को भ्ग्व्हन के सामने उछालें नहीं|
भगवान आपकी श्रधा से प्रसन्न होतें हैं न कि आपके attitude से|
attitude भलें ही एक व्यक्ति को दुसरे व्यक्ति से जोड़ता हों, लेकिन भगवान से जुड़ने के लिए आपको मन कि श्रधा कि जरुरत पड़ेगी|
मै यहाँ हर मंदिर कि बात नहीं कर रहा और हो सकता हैं आप बहुत से लोगों को यह बात निर्थरक लगें लेकिन अगर आप मेरी बात से जरासा भी सहमत हैं तोह इसे जरुर और लोगों तक भी पहुंचाये|
Thanks for reading.
पंचतत्र कि कहानियां पड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें|

0 Comments