तूफानों के नाम कैसे रखते हैं
जिस तरह हर इंसान के लिए उसका नाम उसकी पहचान के लिए विशेष महत्व रखता हैं| उसी तरह तूफ़ान आने से पूर्व या तूफ़ान आने पर रेडियो अथवा दूरदर्शन पर तूफ़ान कि ब्रोडकास्टिंग करने के लिए विशेष नाम कि आवश्कयता होती हैं | आपने टीवी पर सुनामी,कटरीना,हरिकेन चक्रवात जैसे बहुत से नाम सुने होंगे| क्या आप जानना चाहेगें कि इनका नाम कैसे रखा जाता हैं –
दुनियाभर में आने वाले तुफानो के नाम का चुनाव विश्व मोसम विज्ञान संगठन कि अंतरास्ट्रीय संस्था एक कड़ी प्रकिया के द्वारा करती हैं|
यह जानना मज़े कि बात हैं कि सन 1950 से पहले तूफानों को उनके सन के नाम से जाना जाता था जैसे 1945A, 1945B,1945C लेकिन 1950 के बाद तूफानों का फीमेल नाम और 1979 के बाद तूफानों का नाम मेल नाम भी रखा जाने लगा|
तूफानों के नाम चुनने वाली संस्था इनके नाम छः अलग-अलग लिस्ट में से रोटेट करके चुनती हैं| इसमें से प्रत्येक लिस्ट 21 नाम होतें हैं जो अंग्रेज़ी वर्णमाला के प्रत्येक वर्ण( सिर्फ Q,U,X,Y,Z को छोड़कर) से शुरू होतें हैं| इसके लिए निम्न नियम रखें जाते हैं –
1.नाम छोटा,इंग्लिश या स्पेनिश भाषा का होना चाहिए|
2.इस लिस्ट को हर छ साल में रीसायकल किया जाता हैं|
3.जिन तूफानों में जान माल का ज्यादा नुक्सान होता हैं उन्हें सूची से अलग रख लिया जाता हैं ताकि भविष्य में आने वाले तूफानों से उनकी तुलना कि जा सके|
तूफानों के संदर्भ में ये जानना रोमांचक हैं कि अध्ययन बतातें हैं की फिमेल नाम वाले तूफान ज्यादा तबाही मचाते हैं| इसका सामान्य कारण लोगों की मानसिकता से समझा जा सकता हैं, लोग फीमेल नाम वाले तूफानों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते,इस कारण बचाव के ज्यादा उपाय नहीं किये जाते जिस कारण जान-माल को ज्यादा नुक्सान होता हैं| जैसे २०११में हिन्द महासागर में आयी सुनामी से हिन्द महासागर से किनारे वाले 14 देशों में तबाही ओर २.९० लाख लोगों कि मौत हुई|

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