भारत ने मौसम विज्ञान में सटीक भविश्यवाणी के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा inset 3DR की लॉन्चिंग के साथ ही बड़ा कदम उठाया हैं।
अब तक जहाँ कुछ चुनिंदा देश ही सटीक मौसम भविष्यवाणी कर सकते हैं जिनमे जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं, आने वाले समय में भारत भी इस उपलब्धि को प्राप्त कर लेगा।
आइये जानते हैं इस ऐतिहासिक कदम के बारें में विस्तार से...
भारत ने 8 सितम्बर 2016 को श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण स्थल से स्वदेश निर्मित रॉकेट की मदद से दो टन से अधिक वजनी अत्याधुनिक मौसम उपग्रह 'इनसैट-3डीआर' प्रक्षेपित किया। जीएसएलवी श्रेणी के नवीनतम रॉकेट जीएसएलवी-एफ05 के जरिए मौसम उपग्रह को सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लांच पैड से प्रक्षेपित किया गया।
यह जीएसएलवी का पहला ऑपरेशनल लॉन्च है। जीएसएलवी इसरो के अत्याधुनिक मौसम उपग्रह इनसैट-3डीआर को लेेकर गया और उसे कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित भी कर दिया। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए यह बहुत बड़ी कामयाबी है। गौरतलब है कि जीएसएलवी-एफ05 के प्रक्षेपण को 'अनोमली' के चलते 40 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया था।
इनसैट-3डीआर का विशेष विवरण:
- इनसैट-3डीआर का वजन 2,211 किलो है। इसका कंट्रोल कर्नाटक के हासन स्थित इसरो सेंटर के पास होगा। सैटेलाइट को पृथ्वी के आॅर्बिट में पहुंचने में 17 मिनट का समय लगा। ये पहला मौका है जब इसरो ने एडवांस्ड स्वदेशी क्रायोजेनिक (क्रायोजेनिक अपर स्टेज) इंजन के जरिए ज्यादा वजनी सैटेलाइट स्पेस में भेजा है।
- इनसैट-3डीआर में 6 चैनल इमेजर और 19 चैनल साउंडर उपकरण लगे हैं। इनके जरिए सैटेलाइट रात में बादलों और धुंध के बीच भी मौसम की सटीक जानकारी देगा। थर्मल इंफ्रारेड बैंड से समुद्र के टेम्परेचर का सही अनुमान लगाया जा सकता है।
- इसमें लगे 1,700 वाॅट सौर पैनल के जरिए सैटेलाइट खुद इलेक्ट्रिसिटी बनाएगा। इनसैट-3डीआर इसरो के द्वारा बनाया गया चौथा वेदर सैटेलाइट है। इससे पहले 2002 में कल्पना-1, 2003 में इनसैट-3ए और 2013 में इनसैट-3डी लॉन्च हो चुके हैं।
- सैटेलाइट लॉन्चर जीएसएलवी-एफ5 की ये चौथी उड़ान है। सैटेलाइट आईएमडी दिल्ली, अहमदाबाद सेंटर को जानकारी भेजेगा। इस मिशन पर 400 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। अगर यह सैटेलाइट विदेश से खरीदकर लॉन्च करवाया जाता तो इससे दोगुना खर्च होता।
जीएसएलवी-एफ05:
- जीएसएलवी-एफ05 के प्रक्षेपण में स्वदेश में विकसित क्रायोजेनिक अपर स्टेज (सीयूएस) को भेजा जाएगा और यह जीएसएलवी की चौथी उड़ान होगी। जीएसएलवी-एफ05 इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्रायोजेनिक अपर स्टेज को ले जाते हुए जीएसएलवी की पहली संचालन उड़ान है।
- इससे पहले, इसी तरह के विन्यास के साथ जीएसएलवी की उड़ान के साथ जनवरी 2014 में डी5 को और अगस्त 2015 में डी6 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर क्रमश: जीएसएटी-14 और जीएसएटी-6 को लक्षित जीटीओ में पूरी सटीकता के साथ स्थापित किया गया था।
आईएनएसएटी-3डीआर के लाभ:
- इस मॉडर्न सैटेलाइट से रात में भी मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी। सैटेलाइट हिंद महासागर के रेडियो मैसेज को पहचानकर कोस्ट गार्ड को फौरन अलर्ट करेगा। जिससे समुद्र में आपदा में फंसे लोगों तक जल्द मदद पहुंचाई जा सकेगी।
- विभिन्न सेवाएं देने के साथ साथ आईएनएसएटी-3डीआर तटरक्षक, भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण, जहाजरानी एवं रक्षा सेवाओं सहित विभिन्न उपयोगकर्ताओं के लिए आईएनएसएटी-3डी द्वारा मुहैया करई जाने वाली संचालनगत सेवाओं से संबद्ध हो जाएगा। आईएनएसएटी-3डीआर की मिशन अवधि 10 साल है।
क्रायोजेनिक इंजन:
- क्रायोजेनिक इंजन में फ्यूल के तौर पर लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का यूज होता है। यह लिक्विड रॉकेट इंजन की तुलना में बेहतर होता है। भारत छठा ऐसा देश है जिसने क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन डेवलप किया है। इसी इंजन से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के स्पेस व्हीकल अंतरिक्ष में पहुंचते हैं। क्रायोजेनिक इंजन को जीएसएलवी में तीसरे स्टेज में लगाया गया है। अगले साल चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग में भी इसी इंजन का इस्तेमाल होगा।



0 Comments