हाल ही मैं 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए गए हैं। सही समझ नहीं होने के कारण लोगों में तनाव का माहौल हैं।लेकिन इसमें डरने की कोई जरुरत नहीं हैं। पेश हैं आप लोगों के लिए इस संबंध में पूरी जानकारी- 1.पहले कब इसी तरह नोट बंद किये गए।
2.आम आदमी को क्या करना होगा। 3.किस तरह मोदी सरकार ने यह निर्णय लिया।
आखिर कैसे और क्यों लिया ये फैसला-
मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का फैसला रातों रात नहीं लिया। इसके लिए योजना छह महीने पहले बननी शुरू हुई थी। इसका मकसद सिर्फ ब्लैक मनी पर कंट्रोल ही नहीं, बल्कि जाली नोटों से निजात पाना भी था।
द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सरकार के इस फैसले की जानकारी कुछ मुट्ठी भर लोगों को थी। ये लोग थे-प्रिंसिपल सेक्रटरी नृपेंद्र मिश्रा, पूर्व और वर्तमान आरबीआई गवर्नर, वित्त सचिव अशोक लवासा, आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास और वित्त मंत्री अरुण जेटली। सूत्रों के मुताबिक, योजना को लागू करने की प्रक्रिया दो महीने पहले शुरू हुई। सूत्रों ने अखबार से बताया, 'हमारी काययाबी की वजह यही है कि हम इस योजना को पर्दे के पीछे रख सके। हालांकि, अचानक से की गई घोषणा की वजह से हमारे सामने इस योजना को लागू करन से जुड़ी कुछ चुनौतियां आने की आशंका है।'
एक अधिकारी ने बताया कि जाली नोट ज्यादा बड़ी समस्या नहीं हैं। ऐसे नोट 400 से 500 करोड़ रुपए के हो सकते हैं। अधिकारी के मुताबिक, बाजार में चल रहे नोटों के मुकाबले, ये रकम बेहद छोटी है। योजना का मकसद ब्लैक मनी पर कार्रवाई है, लेकिन इसके तहत कितनी रकम छिपी हुई है, इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है। एक अन्य अधिकारी का मानना है कि इस नई कवायद की वजह से क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और चेक से पेमेंट में काफी तेजी आने वाली है।
अब आप क्या करेंगे जानिए-
1. 500 और 1000 के पुराने नोट बैंक या पोस्ट ऑफिस के अपने अकाउंट में जमा कर दें 30 दिसंबर तक. हालांकि आप हर दिन सिर्फ दस हज़ार निकाल पाएंगे और हर हफ्ते बीस हज़ार.
2. 500 और 1000 के नोट आई कार्ड दिखा कर मुख्य पोस्ट ऑफिस और छोटे पोस्ट ऑफिस में बदले जा सकेंगे लेकिन 24 नवंबर तक सिर्फ 4000 रूपए बदले जा सकेंगे.
3. चेक, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या डिमांड ड्राफ्ट से भुगतान करने पर किसी तरह की कोई सीमा या बंदिश नहीं है.
4. नौ नवंबर को और कुछ स्थानों पर 10 नवंबर को भी एटीएम काम नहीं करेंगे. कुछ समय तक एक दिन में 4 हज़ार रूपए ही निकाले जा सकेंगे. आगे चलकर इसे बढ़ा दिया जायेगा।
पहले भी लिए जा चुके हैं ऐसे निर्णय-
पहला मौक़ा नहीं है जब बड़े नोट बंद किए गए हैं.
साल 1946 में में भी हज़ार रुपए और 10 हज़ार रुपए के नोट वापस लिए गए थे.
फिर 1954 में हज़ार, पांच हज़ार और दस हज़ार रुपए के नोट वापस लाए गए.
उसके बाद जनवरी 1978 में इन्हें फिर बंद कर दिया गया.
दोनों ही मौक़ों पर 'भ्रष्ट लोगों को सामने लाने' के उद्देश्य से ये क़दम उठाए गए.
1978 में जब ये नोट वापस लिए गए उसके पीछे एक दिलचस्प वाकया है.
तब जनता पार्टी गठबंधन को सत्ता में आए एक साल ही हुआ था.
सरकार ने 16 जनवरी को एक अध्यादेश जारी कर हज़ार, पांच हज़ार और 10 हज़ार के नोट वापस लेने का फ़ैसला किया.
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के ऐतिहासिक दस्तावेज़ (थर्ड वॉल्यूम) में पूरी प्रक्रिया का ब्यौरा दिया गया है.
14 जनवरी 1978 को रिज़र्व बैंक के चीफ़ अकाउटेंट ऑफ़िस के वरिष्ठ अधिकारी आर जानकी रमन को फ़ोन कर दिल्ली बुलाया गया.
जब रमन दिल्ली पहुंचे तो उनसे एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार बड़े नोट वापस लेने का मन बना चुकी है और इससे संबंधित ज़रूरी अध्यदेश वो एक दिन में बनाएं.
इस दौरान रिज़र्व बैंक के मुंबई स्थित केंद्रीय दफ़्तर से किसी भी तरह की बातचीत के लिए सख्त मना किया गया क्योंकि इससे बेवजह की अटकलों के फैलने का डर था.
तय समय पर ये अध्यादेश तैयार हो गया और इसे तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया.
16 जनवरी की सुबह नौ बजे आकाशवाणी के बुलेटिन में इन बड़े नोटों के बंद होने की ख़बर का प्रसारण हो गया.
अध्यादेश के मुताबिक़ अगले दिन यानी 17 जनवरी को सभी बैंकों के बंद रहने का ऐलान कर दिया गया.
Top 10 richest indians....
उस वक़्त के रिज़र्व बैंक के गवर्नर आई जी पटेल ने अपनी एक किताब में इस घटना के बारे में विस्तार से बताया है.
पटेल ने लिखा है कि वो सरकार के इस फ़ैसले के पक्ष में नहीं थे.
उनके मुताबिक़ जनता पार्टी की सरकार के ही कुछ सदस्य मानते थे कि पिछली सरकार के कथित भ्रष्ट लोगों को निशाना बनाने के लिए ये क़दम उठाया गया है.
पटेल ने ये भी लिखा कि जब तत्कालीन वित्त मंत्री एच एम पटेल ने उनसे नोट वापस लेने को कहा तो उन्होंने, वित्त मंत्री को साफ़ कहा था कि इस तरह के फ़ैसलों से मनमाफ़िक परिणाम कम ही मिलते हैं.
आई जी पटेल ने लिखा कि काले धन को नक़द के रूप में बहुत कम लोग लंबे समय तक अपने पास रखते हैं.
पटेल के मुताबिक़, सूटकेस और तकिए में बड़ी रकम छुपाकर रखने का आइडिया ही बड़ा बचकाना किस्म का है और जिनके पास बड़ी रक़म कैश के तौर पर है भी वो भी अपने एजेंट्स के ज़रिए उन्हें बदलवा लेंगे.
2.आम आदमी को क्या करना होगा। 3.किस तरह मोदी सरकार ने यह निर्णय लिया।
आखिर कैसे और क्यों लिया ये फैसला-
मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का फैसला रातों रात नहीं लिया। इसके लिए योजना छह महीने पहले बननी शुरू हुई थी। इसका मकसद सिर्फ ब्लैक मनी पर कंट्रोल ही नहीं, बल्कि जाली नोटों से निजात पाना भी था।
द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सरकार के इस फैसले की जानकारी कुछ मुट्ठी भर लोगों को थी। ये लोग थे-प्रिंसिपल सेक्रटरी नृपेंद्र मिश्रा, पूर्व और वर्तमान आरबीआई गवर्नर, वित्त सचिव अशोक लवासा, आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास और वित्त मंत्री अरुण जेटली। सूत्रों के मुताबिक, योजना को लागू करने की प्रक्रिया दो महीने पहले शुरू हुई। सूत्रों ने अखबार से बताया, 'हमारी काययाबी की वजह यही है कि हम इस योजना को पर्दे के पीछे रख सके। हालांकि, अचानक से की गई घोषणा की वजह से हमारे सामने इस योजना को लागू करन से जुड़ी कुछ चुनौतियां आने की आशंका है।'
एक अधिकारी ने बताया कि जाली नोट ज्यादा बड़ी समस्या नहीं हैं। ऐसे नोट 400 से 500 करोड़ रुपए के हो सकते हैं। अधिकारी के मुताबिक, बाजार में चल रहे नोटों के मुकाबले, ये रकम बेहद छोटी है। योजना का मकसद ब्लैक मनी पर कार्रवाई है, लेकिन इसके तहत कितनी रकम छिपी हुई है, इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है। एक अन्य अधिकारी का मानना है कि इस नई कवायद की वजह से क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और चेक से पेमेंट में काफी तेजी आने वाली है।
अब आप क्या करेंगे जानिए-
1. 500 और 1000 के पुराने नोट बैंक या पोस्ट ऑफिस के अपने अकाउंट में जमा कर दें 30 दिसंबर तक. हालांकि आप हर दिन सिर्फ दस हज़ार निकाल पाएंगे और हर हफ्ते बीस हज़ार.
2. 500 और 1000 के नोट आई कार्ड दिखा कर मुख्य पोस्ट ऑफिस और छोटे पोस्ट ऑफिस में बदले जा सकेंगे लेकिन 24 नवंबर तक सिर्फ 4000 रूपए बदले जा सकेंगे.
3. चेक, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या डिमांड ड्राफ्ट से भुगतान करने पर किसी तरह की कोई सीमा या बंदिश नहीं है.
4. नौ नवंबर को और कुछ स्थानों पर 10 नवंबर को भी एटीएम काम नहीं करेंगे. कुछ समय तक एक दिन में 4 हज़ार रूपए ही निकाले जा सकेंगे. आगे चलकर इसे बढ़ा दिया जायेगा।
पहले भी लिए जा चुके हैं ऐसे निर्णय-
पहला मौक़ा नहीं है जब बड़े नोट बंद किए गए हैं.
साल 1946 में में भी हज़ार रुपए और 10 हज़ार रुपए के नोट वापस लिए गए थे.
फिर 1954 में हज़ार, पांच हज़ार और दस हज़ार रुपए के नोट वापस लाए गए.
उसके बाद जनवरी 1978 में इन्हें फिर बंद कर दिया गया.
दोनों ही मौक़ों पर 'भ्रष्ट लोगों को सामने लाने' के उद्देश्य से ये क़दम उठाए गए.
1978 में जब ये नोट वापस लिए गए उसके पीछे एक दिलचस्प वाकया है.
तब जनता पार्टी गठबंधन को सत्ता में आए एक साल ही हुआ था.
सरकार ने 16 जनवरी को एक अध्यादेश जारी कर हज़ार, पांच हज़ार और 10 हज़ार के नोट वापस लेने का फ़ैसला किया.
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के ऐतिहासिक दस्तावेज़ (थर्ड वॉल्यूम) में पूरी प्रक्रिया का ब्यौरा दिया गया है.
14 जनवरी 1978 को रिज़र्व बैंक के चीफ़ अकाउटेंट ऑफ़िस के वरिष्ठ अधिकारी आर जानकी रमन को फ़ोन कर दिल्ली बुलाया गया.
जब रमन दिल्ली पहुंचे तो उनसे एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार बड़े नोट वापस लेने का मन बना चुकी है और इससे संबंधित ज़रूरी अध्यदेश वो एक दिन में बनाएं.
इस दौरान रिज़र्व बैंक के मुंबई स्थित केंद्रीय दफ़्तर से किसी भी तरह की बातचीत के लिए सख्त मना किया गया क्योंकि इससे बेवजह की अटकलों के फैलने का डर था.
तय समय पर ये अध्यादेश तैयार हो गया और इसे तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया.
16 जनवरी की सुबह नौ बजे आकाशवाणी के बुलेटिन में इन बड़े नोटों के बंद होने की ख़बर का प्रसारण हो गया.
अध्यादेश के मुताबिक़ अगले दिन यानी 17 जनवरी को सभी बैंकों के बंद रहने का ऐलान कर दिया गया.
Top 10 richest indians....
उस वक़्त के रिज़र्व बैंक के गवर्नर आई जी पटेल ने अपनी एक किताब में इस घटना के बारे में विस्तार से बताया है.
पटेल ने लिखा है कि वो सरकार के इस फ़ैसले के पक्ष में नहीं थे.
उनके मुताबिक़ जनता पार्टी की सरकार के ही कुछ सदस्य मानते थे कि पिछली सरकार के कथित भ्रष्ट लोगों को निशाना बनाने के लिए ये क़दम उठाया गया है.
पटेल ने ये भी लिखा कि जब तत्कालीन वित्त मंत्री एच एम पटेल ने उनसे नोट वापस लेने को कहा तो उन्होंने, वित्त मंत्री को साफ़ कहा था कि इस तरह के फ़ैसलों से मनमाफ़िक परिणाम कम ही मिलते हैं.
आई जी पटेल ने लिखा कि काले धन को नक़द के रूप में बहुत कम लोग लंबे समय तक अपने पास रखते हैं.
पटेल के मुताबिक़, सूटकेस और तकिए में बड़ी रकम छुपाकर रखने का आइडिया ही बड़ा बचकाना किस्म का है और जिनके पास बड़ी रक़म कैश के तौर पर है भी वो भी अपने एजेंट्स के ज़रिए उन्हें बदलवा लेंगे.


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