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दुनिया के सबसे दर्दनाक हादसे का फैसला   (भाग -2)

दुनिया के सबसे दर्दनाक हादसे का फैसला   (भाग -2)

पिछले भाग में आपने हिरोशिमा पर हुए हमले के बारे में जाना, इस भाग में पढीये नागासाकी पर हुए हमले के सीक्रेट तथ्य के साथ रोचक जानकारी|
हिरोशिमा के बाद नागासाकी पर बम क्यों गिराया गया?
यह सवाल स्वाभाविक हैं कि जब अमेरिका ने हिरोशिमा पर अपने बम के विनाशकारी प्रभाव को देख लिया था तो उसने नागासाकी पर फिर बम क्यों गिराया|
यदि हम उस समय के हालातों का अध्ययन करें तों हम समझ सकते है की नागासाकी पर बम गिरना जरुरी नहीं था,संभवतः अमेरिका ने अपने युरेनियम आधारित बम के प्रयोग के बाद प्लूटोनियम आधारित बम का प्रभाव जानने के लिए एवं जापान को पूरी तरह से कमजोर करने के लिये दोबारा बम का प्रयोग किया|

नागासाकी हमले से जुड़ा सीक्रेट तथ्य -
वास्तव में अमेरिका ने हिरोशिमा के बाद नागासाकी को अपना लक्ष्य नहीं बनाया था बल्कि जापान के दुसरे प्रमुख सस्त्र निर्माण नगर कोकुरा को अपना लक्ष्य बनाया था| लेकिन उस समय कोकुरा में मौसम परिवर्तन के कारण हवाईजहाज का वहां जा पाना संभव नहीं था, इस कारण इस मिशन से पीछे हटना पड़ा|
हाल ही में कोकुरा के पूर्व मजदूर 85 वर्षीय ‘सत्त्तीय मियाशिरो’ के अनुसार उस समय 9 अगस्त को उन्हें व उनके साथियों को इस हमलें का पूर्व अंदेशा हुआ तो उन्होंने अपने साथियों के साथ फैक्ट्री कि चिमनियों में खूब सारा कोलतार डाल कर शुरू कर दिया जिससे सारे आसमान में धुँआ छा गया और अमेरिकी प्लेन का वहां उड़ पाना असहज हों गया|

जापान पर किये गए हमलें के बारें में इससे संबंधित देश (जापान,अमेरिका,जर्मनी,रूस) अलग अलग मत दर्शाते हैं, जानते हैं उनके मत –
अमेरिका -  अमेरिका की हाई स्कूल की कीताबों में पडा जाता हैं कि बम गिराना मजबूरी था| इससे युद्ध जल्दी ख़त्म हुआ और जापान सरेंडर के लिए तैयार हुआ| जबकि वास्तव में इस हमलें की जरुरत ही नहीं थी क्योंकि इससे पहले ही जापान सरेंडर के लिए तैयार हो गया था बदले में वह अपने राजा कि सुरक्षा चाहता था|
जर्मनी- जर्मनी युध में अपनी भूमिका सेवियर अर्थात बचाने वाले के रूप में मानता हैं| तथा युद्ध के लिये असली वजह अमेरिका को मानता हैं|
जापान- जापान के स्कूलों में पढ़ाया जाता कि जापान कि हालत तो पहले हि ख़राब हों चुकीं थी लेकिन अमेरिका ने अपनी ताकत दिखने के लिए परमाणु बम गिराए|
रूस- रूस इस युद्ध में खुद को विजेता मानता हैं,उनके अनुसार जो काम अमेरिका चार साल में नहीं कर सका वो रूस के आतें ही चार दिन में पूरा हो गया|
भारत में इस घटना का मूल्याङ्कन करतें हुए बताया गया हैं कि उस समय ब्रिटेन,रूस,अमेरिका में मानसिक रूप से कमजोर नेता थे, जिस कारण यह निर्णय लिया गया|

वर्तमान में आणविक हथियारों की समस्या-
भलें ही जापानी प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से यह कहें की वे दुनिया को आणविक हथियारों से मुक्त करने कि पूरी कोशिश करेंगे| किन्तु इस लक्ष्य को वर्तमान में प्राप्त कर पाना बहुत मुस्किल लग रहा है| आज जहाँ हर जगह आतंकवाद,नक्सलवाद का बोलबाला हैं| हर देश ने अपने अपने परमाणु हथियार जमा कर लिए हैं और इनके आधार पर दुसरे देशों को भी अप्रत्यक्ष रूप से धमकाने से भी नहीं कतरा रहें| विभिन्न आतंकी संगटन भी इसी कोशिश में लगे रहते हैं कि किसी तरह उन्हें परमाणु हथियार मिल जाए हालांकि यह उनके लिए असम्भव बात हैं|
जापान के शहरों पर हुए हमलों कि ख़ास बात यह रही कि सभी देशों ने उस समय ही इन घटक हथियारों के प्रभाव को देख लिया,और इसके बा किसी भी देश ने इन हथियारों का प्रयोग करने कि हिम्मत नहीं की| अगर वर्तमान में इन हथिरों का प्रयोग किया जाये तोह इनसे होने वाले नुक्सान का आकलन असंभव हैं क्यूंकि आधुनिक आणविक हथियार पूर्व के हथियारों से कई गुना ताकतवर हैं| 

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