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हम क्या से क्या बनते जा रहे हैं

हम क्या से क्या बनते जा रहे हैं

        मेरा आप सभी से सवाल हैं क्या आपने कभी सोचा हैं आज हम मनुष्य किस और बढ़ते जा रहे हैं?
        भगवान ने हमें एक उम्दा शरीर दिया इस शरीर को सुचारू रखने के लिए अद्भुत मस्तिष्क दिया,कुशल अंग दिए। और निश्चित रूप से इस संसार में आने के लिए कोई न कोई उद्देश्य निर्धारित किया।
           लेकिन जरा ठहरें क्या हम सब जानते हैं हमारे इस संसार में आने का क्या उद्देश्य हैं.... शायद नहीं । इसमें कोई बुरी बात नहीं है कि आपको अपने जीवन में लक्ष्यों का पता नहीं हैं बुरी बात तब हैं जब हम इस दिशा में सोचने का प्रयास भी छोड़ देते हैं। निशित रूप से यह अकर्मण्यता काफी गलत हैं।

             जरा आप कुछ समय के लिए अपने बहुउपयोगी स्मार्टफोन और अन्य तकनीकों से समय निकालकर अपनी या अपने आस -पास के लोगों की दिनचर्या का निरिक्षण कीजिये।
आप क्या पाते है? आप पातें हैं कि लोगों की दिनचर्या यंत्रवत होती जा रही हैं। रोज़ सुबह उठना, उठते ही अपने स्मार्टफोन के नोटिफिकेशन चेक करना,नास्ता करना और अपने काम पर निकल जाना , जैसे तैसे काम निबटाकर वापस आना ,खाना खाना और सो जाना। अधितकर दिनचर्या के यही अंग होते हैं।
जब कभी आप अपने लिए कुछ समय निकल कर आत्मचिंतन करंगे तब आपको पता चलेगा आप जीवन में कितना कुछ व्यर्थ कर रहे हैं रोज़ के 24 घंटे एक मशीन की तरह ही व्यतीत कर रहे हैं।


            अपने इंसान होने पर गर्व कीजिये और हर रोज़ कुछ ऐसा काम कीजिये जो आपके और आपके आस पास के लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाये। जैसे- किसी वृद्ध की मदद करना,बच्चों के साथ खेलना,अपनी पत्नी को कुछ गिफ्ट करना,अपने माता पिता का सम्मान करना ,बस में सफर करते समय जरुरतमंद व्यक्ति को सीट उपलब्ध करवाना और भी ऐसी बहुत से छोटे छोटे प्रयास।
         यकीं मानिये यदि आप ऐसे खुशियां बाटने के प्रयास करेंगे तो आप अपने जीवन को सार्थक बनता हुआ पाएंगे।

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