प्रकृति में जितनी भी जीव अजीव वस्तुये हमें दिखाई देती है बेशक नश्वर है अर्थार्थ सभी वस्तुओं का अंत एक ना एक दिन होना ही है. आइए जानते हैं क्या होता है जब मनुष्य का शरीर मृत हो जाता है -
१.सबसे पहली बात किसी व्यक्ति को डॉक्टर द्वारा तब मृत घोषित किया जाता है जब व्यक्ति के हृदय के द्वारा किसी भी तरह का कोई रिस्पांस नहीं दिया जा रहा हो तथा मस्तिष्क पूरी तरह से काम करना बंद कर दे.
२.इसके तुरंत बाद ही हमारे आंखों की पलकें पूर्णता शिथिल हो जाती है जिसे वैज्ञानिक भाषा में प्राइमरी प्लेसिडिटी कहते हैं.

३.इसके बाद शरीर का तापमान धीरे-धीरे कम होने लगता है और यह इसके आसपास के वातावरण के तापमान के बराबर हो जाता है जिसे डेथ चिल कहते हैं.
४.इसके बाद हृदय रक्त को पंपिंग करना बंद कर देता है जिससे रक्त शरीर के निचले हिस्सों में जमा होने लग जाता है और जिससे शरीर नीला पड़ने लगता है इसे livor mortis कहते हैं.
5.इसके बाद 3-6 घंटों में मांसपेशियों में सिकुड़न प्रारंभ हो जाती है.(rigor mortis)
6.24 से 84 घंटों के बीच में मांसपेशियों में फिर से शिथिलन प्रारम्भ हो जाती हैं.
7.अब यदि शरीर को जला दिया जाता है तो यह राख में बदल जाता है और यदि इसे जलाया नहीं जाता है तो इसमें डीकंपोजिंग की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है जिससे ब्लड का सरकुलेशन जाम हो जाता है और शरीर किसी भी रूप में वेस्ट पदार्थों को बाहर नहीं निकाल पाता जैसे कि कार्बन डाई ऑक्साइड.
इसके कारण शरीर के अंदर अम्लीय वातावरण का निर्माण हो जाता है और इस अमली वातावरण में निर्मित एंजाइम शरीर को अंदर से खाने लगते हैं शरीर का सारा इम्यून सिस्टम समाप्त हो जाता है और शरीर से निकलने वाली विभिन्न गैसो से मक्खियों तथा विभिन्न अपघटक जीवो को आकर्षित होते है जो शरीर के विभिन्न उत्तकों को तोड़ते हुए आ जाते हैं धीरे-धीरे सारा शरीर कंकाल में बदलकर पूर्ण रूप से समाप्त हो जाता है.

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