भारत में आपातकाल (1975 - 1977)
आपातकाल यानि ' EMERGENCY ' का नाम सुनते ही,आपातकाल के समय को जीने वाले लोगों कि यादें ताज़ा हो जाती हैं | किंतु हम में से अधिकांश लोगों ने सिर्फ आपातकाल का नाम सुना हैं इस कारण हमें आपातकाल के निर्माण के कारणों और उस समय कि घटनाओ के बारे में पता नहीं हैं|
आज कि पोस्ट में उपलब्ध हैं आपके लिए आपातकाल से जुडी जानकारी|
आपातकाल क्या हैं - (what is emergency )--
सबसे पहले हम यह जानेगे कि आपातकाल क्या हैं और यह कीस स्तिथि में लगता हैं|
" देश कि आंतरिक शांति को खतरा होने,बाह्य आक्रमण होने अथवा वित्तीय संकट कि स्तिथि में आपातकाल कि घोषणा कि जाती हैं|" भारत में अब तक तीन बार आपातकाल लग चूका हैं|
आपातकाल की प्रस्ठभूमि तैयार करने वाले प्रमुख कारण -
1.आर्थिक स्वतंत्रता का सीमित होना (समाजवाद का प्रभाव)
2.मंदी से बढता असंतोष
3.शीर्ष अदालतों का निर्णय
4.जयप्रकाश नारायण का आन्दोलन
1.आर्थिक स्वतन्त्रा का सिमित होना - 1971 के युद्ध में सोवियत संघ ने भारत का तो अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया| इसके कारण भारत कि आर्थिक नित्यों पर सोवियत संघ कि नितीयों का प्रभाव बढता गया| व्यापार पर राज्य का नियन्त्रण बढता गया, आयकर कि दरें 80-90% तक पहूच गयी|
2.मंदी से बढता असंतोष - दुर्भाग्य से 1971-72 और 1972-73 भरी सूखे वालें वर्ष रहें| इससे एक तरफ अनाज उत्पादन गिरण तो एक तरफ बिजली उत्पादन| इसी समाया कच्चे तेल के दाम तिन गुना तक बड गए तथा महगाई 10% से अधिक रहीं|
3.शीर्ष अदालतों के निर्णय- (जून 1975) इन बिगड़ती परिस्थितियों में इलाहबाद हिघ्कोउर्ट के निर्णय ने स्थितियों को ओर बिगडन| न्यायधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने 12 जून 1975 अपने निर्णय में इंदिरा गाँधी पर छः साल तक चुनाव लड़ने का प्रतिबन्ध लगा दिया|
श्रीमती गाँधी ने इस्तीफा न देकर फैसलें को सुप्रीम कोर्ट में चुनोती दी, जहाँ भी उन्हें बिना शर्त रहत नहीं मिली और विपक्ष ने इस्तिफें कि मांग तेज कर दी|
4. जयप्रकाश नारायण का आन्दोलन :- समग्र क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण कि आपातकाल निर्माण में प्रमुख भूमिका रही| इन्होने अपने आन्दोलन कि शरुआत बिहार के छात्रसंघ आन्दोलन से कि| उन्होंने छात्रों को साल भर के लियें अपना कॉलेज छोड़कर वैकल्पिक राजनीती के निर्माण के लियें प्रेरित किया| सभी राजनितिक दल इस समय जेपी के साथ खाधे हो गए,और सबने मिलकर इंदिरा गाँधी को पद से हटाने का संकल्प ले लियां|
भलें ही जेपी कि सम्रग क्रांति कि अवधारणा सार्थक नहीं हुई किंतु इसने आपातकाल कि पृष्ठभूमि तैयार कि|
आपातकाल के उजले और कालें पक्ष:-
उजले पक्ष (+ पॉइंट्स)-
1.emergency को विनोदा भावे ने अनुशासन पर्व कहा|
2.सरकारी काम काज में पाबन्दी दिखने लगीं, घंटों देरी से चलने वाली ट्रेने समय पर चलने लगीं|
3.जमाखोरों पर सकत कारवाई हुई|
4.सारे देश में अतिकर्मन हटायें गयें|
5.अधिकारियों में चुस्ती दिखने लगीं
6.मुनाफाखोरी पर रोक लगी व् महगाई भी काबू में आई|
कालें पक्ष (- पॉइंट्स)
1.सविंधान प्रदात मौलिक अधिकार व् न्य्यायिक सुरक्षा समाप्त कर दिए|
2.प्रेस पर पाबन्दी लगन दी गयी|
3.सत्ता के विकेंदिकरण को बढावा मिला|
लोकतंत्र को झटका|
4.जबरन नसबंदी कि गयी ,कई मामलों में तो अविवाहित के साथ भी|
इस तरह आपातकाल ने भारतियों को कई कटु अनुभव देने के साथ-साथ सीख और जिम्मेदारी का एहसास भी कराया|जनता ने लोकतंत्र के बाधक शासन को उखाड़ फेंका और प्रदर्शित किया कि कोई भी शासन जनता के हितों को नजरअंदाज करके नहीं चलाया जा सकता|

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